आपको क्षणिक यह अनुमान लगाने की आवश्यकता नहीं है कि भारत में इंटरनेट का भविष्य मोबाइल और मातृभाषाएं है। मोबाइल फर्स्ट इंटरनेट विकास में अधिकतम ग्रामीण और सशक्त लोगों का समावेश होगा।  

2011 की जनगणना के अनुसार, अंग्रेजी 256,000 लोगों की प्राथमिक भाषा (मातृभाषा), 83 मिलियन लोगों की दूसरी भाषा और 4.6 करोड़ लोगों की तीसरी भाषा है, जो हिंदी के बाद बोली जाने वाली दूसरी सबसे बड़ी भाषा है। परंतु यह भी याद रखना चाहिए कि हिंदी में 50 से अधिक उपबोलियाँ हैं जो लाखों लोगों द्वारा बोली जाती हैं। 

जब हमारे अधिकांश लेन-देन और ऑपरेशनल कार्य अंग्रेजी में होते हैं तो हमें और सुधार करने – बेहतर और स्पष्ट संचार, समझने में आसानी और व्यावसायिक परिणामों में वृद्धि के लिए, इन्हें भारतीय भाषाओं में प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। 

चेकआउट प्रवाह में बदलाव लाने के लिए, जिनका भारत भर के व्यवसायियों द्वारा अनुसरण किया जा रहा है, हमें, रेजरपे में, अपनी नवीनतम पेशकश – मातृभाषा चेकआउट की घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है। यह लेख पृष्टभूमि और समस्या विवरण,  समाधान और इससे अधिक के बारे में बात करता है।

प्रयोजन और प्रवेश जाँच

इंटरनेट, स्मार्टफोन उपकरणों और विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से ज्ञान तक आसान और किफायती पहुंच के साथ, टियर 2 और टियर 3 के  शहरों के यूजरों में, ऑनलाइन खरीदारी करने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है।     

जैसा ही टियर 2 और टियर 3 शहरों में लोग ऑनलाइन आते हैं और ऑनलाइन पेमेंट करना शुरू करते हैं तो प्राय: उनके सामने ऐसे इंटरफेस आते है जो उनकी मातृभाषा में नहीं हैं। ऐसी संभावनाएं हैं कि वे वांछित उत्पाद खोज लेते हैं और ऐप या वेबसाइट के माध्यम से किसी तरह नेविगेट करते हैं। परंतु, जब पेमेंट स्वीकार करने की बात आती है तो यह थोड़ा मुश्किल हो जाता है। और यहां तक ​​कि यदि वह चीजों का पता लगा लेते हैं तो ऐसे मामलों में, रूपांतरण बहुत अधिक हो रहा है जहां पेमेंट चेकआउट उनकी पसंदीदा भाषा में उपलब्ध है।

अधिक रूपांतरणों के लिए रेजरपे वर्नाक्युलर चेकआउट की प्रस्तुति 

जैसे ही भारतीय भाषाओं का कोई यूजर, भारत में पेमेंट का उपयोग करना शुरू करता है तो मानक चेकआउट को इस नए जनसांख्यिकीय की आवश्यकताओं को पूरा करने का ध्यान रखना होगा कि यह उनके लिए समझना आसान हो कि चेकआउट पर क्या मौजूद है और वे इसका उपयोग कैसे कर सकते हैं। शुरुआत करने के लिए, रेजरपे हिंदी में चेकआउट प्रस्ताव कर रहा है और जल्दी ही 6 और भारतीय भाषाओं में चेकआउट प्रारंभ करने जा रहा है। 

आने वाले समय में, रेजरपे  अन्य भारतीय भाषाओं जैसेकि तमिल, बंगाली, तेलुगु, मराठी, गुजराती और कन्नड़ में भी चेकआउट शुरू करेंगे।

जब हम पहली भारतीय  भाषाओं में चेकआउट प्रणाली को प्रस्तुत करते हैं तो यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि प्रत्येक ग्राहक को मामले में अंग्रेज़ी में वापस जाने की पेशकश उपलब्ध हो। रेजरपे  मातृभाषा चेकआउट में, अंतिम उपभोक्ताओं के पास चेकआउट पर एक पसंदीदा भाषा का चयन करने का विकल्प उपलब्ध होगा। हमारी प्रणाली, स्वत: अपने ब्राउज़र के माध्यम से यूजर की पसंदीदा भाषा का पता लगाएंगी और चेकआउट को उस भाषा में दिखाएंगी। 

यदि यूजर, चेकआउट में प्रदर्शित भाषा के अतिरिक्त किसी अन्य भाषा में चेकआउट का उपयोग करता है तो यह उस यूजर के लिए डिफ़ॉल्ट सेट किया जाएगा। वैकल्पिक रूप से, मर्चेन्ट अपने यूजरों के लिए किसी भी डिफ़ॉल्ट भाषा को सेट कर सकते हैं और हरेक पेमेंट स्तर पर चेकआउट दिखाने के लिए हमें एक दूसरी भाषा दे सकते हैं। एकरूपता बनाए रखने के लिए, रेजरपे ACS पृष्ठ और त्रुटि कोड भी मातृभाषा में दिए जाएंगे।

शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि जब यूजर अंग्रेजी की तुलना में हिंदी में पेमेंट करते हैं तो रूपांतरणों में 14%  की वृद्धि हुई है।

कृपया ध्यान दें: यह सुविधा डिफ़ॉल्ट रूप से सभी रेजरपे यूजरों के लिए चेकआउट पर उपलब्ध होगी। सभी व्यवसायों के लिए डिफ़ॉल्ट को स्वत: ब्राउज़र भाषा का पता लगाने और उस भाषा में चेकआउट दिखाने के लिए सेट किया जाएगा। व्यवसायों को केवल एक विशेष भाषा में चेकआउट दिखाने के लिए इस सेटिंग को बदलने की स्वतंत्रता है।

निष्कर्ष 

मातृभाषा को अपनाना, अप्रयुक्त भौगोलिकी के ‘दोहन’ के समान है। इंटरनेट के उपयोग द्वारा जीवन जीना, हर प्रकार से आसान हो जाता है जो उन्हें एक ऐसा अनुभव देता है जो उन्हें घर का एहसास करा सके और उन्हें रमणीय अनुभव के साथ रहने दे, उन्हें यह केवल आप वापस दिला सकते हैं। 

पेमेंट एक संवेदनशील विषय है। इसे सुव्यवस्थित करना और सुगम बनाना समय की जरूरत है।

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